लुधियाना, 14 फरवरी, 2025 (न्यूज़ टीम): भारत की सबसे बड़ी चीनी तथा हरित ऊर्जा (इथेनॉल और नवीकरणीय ऊर्जा) उत्पादकों में से एक और विलमर शुगर एंड एनर्जी पीटीई लिमिटेड (जिसे पहले विलमर शुगर होल्डिंग्स पीटीई लिमिटेड के नाम से जाना जाता था), सिंगापुर की एक सहायक कंपनी, श्री रेणुका शुगर्स लिमिटेड ने 31 दिसंबर, 2024 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों के वित्तीय परिणाम की घोषणा की है।
समेकित |
वित्त वर्ष ’25 के नौ महीने |
वित्त वर्ष ’24 के नौ महीने |
साल-दर-साल |
एकल |
वित्त वर्ष ’25 के नौ महीने |
वित्त वर्ष ’24 के नौ महीने |
साल-दर-साल |
कुल आय |
82,883 |
79,814 |
4% |
कुलआय |
78,395 |
76,763 |
2% |
एबिट्डा |
4,268 |
4,743 |
-10% |
एबिट्डा |
4,306 |
4,785 |
-10% |
नौ महीनों के परिणामों के मुख्य अंश नीचे संक्षेप में दिए गए हैं –
वित्त वर्ष ’25 के पहले 9 महीने के समेकित एवं एकल परिणाम की मुख्य बातें
वित्त वर्ष ‘25 के 9वें महीने के लिए एकल स्तर पर,
- आय 2% बढ़कर 78,395 मिलियन रुपये रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 76,763 मिलियन रुपये थी।
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी कीमतों में गिरावट के कारण इन्वेंट्री मूल्यांकन पर असर पड़ने के कारण एबिट्डा 10% घटकर 4,306 मिलियन रुपये रहा।
- कुल घरेलू चीनी की मात्रा 30% बढ़कर 322,000 एमटी रही।
- रिफाइनरी ने पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 1,080,000 एमटी की बिक्री की, जो 5% बढ़कर 1,026,000 एमटी रही, बिक्री प्राप्ति (रियलाइज़ेशन) 9% कम रही।
- पिछले मौसम में नीतिगत बदलावों के कारण इथेनॉल डिस्पैच प्रभावित हुआ, जिसका असर इस वित्त वर्ष के दौरान ऑफ-सीज़न में उत्पादन और बिक्री पर पड़ा और साथ ही इथेनॉल की कीमत में संशोधन भी नहीं हुआ। वर्ष 2024-25 में अब तक 9.4 करोड़ लीटर चीनी डिस्पैच हुई जो पिछले साल की इसी अवधि 11.8 करोड़ लीटर थी।
अतुल चतुर्वेदी, कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा, "तीसरी तिमाही के परिणाम मौसम के हालात, राजनीतिक चुनाव और इथेनॉल की कीमत में संशोधन की कमी, पिछले छह वर्षों से चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) में कोई बदलाव नहीं होने के मद्देनज़र विनियामक बाधाओं के कारण पेराई सत्र की शुरुआत में देरी हुई लेकिन इस सबके बावजूद हमारे परिचालन में स्थिर वृद्धि को दर्शाते हैं। सरकार ने हाल ही में 10 लाख मीट्रिक टन घरेलू चीनी के निर्यात की अनुमति दी है, जिससे घरेलू चीनी की कीमतों में सुधार हुआ है, और इसका प्रभाव अगली तिमाहियों में महसूस किया जा सकेगा। इन सभी चुनौतियों के बावजूद, रेणुका सफलतापूर्वक लगातार प्रगति कर रही है।
वित्त वर्ष 2025 के लिए हमारी समेकित आय पिछले साल की तुलना में 4% बढ़ी है। कंपनी ने रिफाइनरी और मिलिंग डिविज़नों में वॉल्यूम में बढ़ोतरी के कारण वित्त वर्ष 2025 का प्रदर्शन मज़बूत रहा।"
सुनील रांका, मुख्य वित्तीय अधिकारी ने कहा, “रेणुका कंसोल का तीसरी तिमाही में मार्जिन सुस्त रहा, जिसके परिणामस्वरूप 9 महीने के आधार पर 10% की नकारात्मक एबिटा वृद्धि हुई। रिफाइनरी निर्यात पूरी क्षमता के अनुरूप रहा। हालांकि, दिसंबर के अंत में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय चीनी की कीमतों में भारी गिरावट आई, जिससे इन्वेंट्री वैल्यूएशन, प्राप्तियों पर असर पड़ा और परिणामस्वरूप एबिट्डा प्रदर्शन में गिरावट आई।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में समय से पहले फूल आने और उत्तर प्रदेश में पौधों की बीमारियों के कारण पैदावार पर संभावित असर पड़ने के कारण चीनी के मौसम की देरी से शुरुआत में और कमी आने की संभावना है। व्यावसायिक चुनौतियों के बावजूद, कंपनी किसानों को समय पर गन्ना बकाया भुगतान करने को प्राथमिकता देना जारी रखेगी।“